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घूमने की स्वतंत्रता कहां तक है संविधान के इस अनुच्छेद में।


व्यक्ति की घूमने की स्वतंत्रता का अधिकार — अनुच्छेद 19 के संदर्भ में

व्यक्ति की घूमने की स्वतंत्रता का अधिकार — अनुच्छेद 19 के संदर्भ में

लेखक: दीपांकर प्रियदर्शी, छात्र – लखनऊ विश्वविद्यालय

परिचय

भारतीय संविधान में निहित मौलिक अधिकार, लोकतांत्रिक व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं। इन अधिकारों में स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom) विशेष महत्व रखता है। यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19, अनुच्छेद 20, अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 22 के अंतर्गत प्रदान किया गया है।

संविधान का अनुच्छेद 19 भारत के नागरिकों को छह प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जिनमें से एक है — भारत के किसी भी भाग में स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार। यह अधिकार विशेष रूप से अनुच्छेद 19(1)(घ) में निहित है, जिसमें नागरिकों को भारत के किसी भी राज्य में बिना किसी अनावश्यक प्रतिबंध के आने-जाने और विचरण करने की स्वतंत्रता दी गई है।

मुख्य प्रावधान — अनुच्छेद 19(1)(घ)

अनुच्छेद 19(1)(घ) के अंतर्गत भारतीय नागरिकों को पूरे भारत में निर्बाध रूप से घूमने और आने-जाने का अधिकार प्राप्त है। वे एक राज्य से दूसरे राज्य में जा सकते हैं और किसी भी राज्य की सीमा के भीतर स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकते हैं।

हालाँकि, अनुच्छेद 19(5) में इस अधिकार पर कुछ युक्तिसंगत प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगाए गए हैं, जो निम्न परिस्थितियों में लागू हो सकते हैं—

  1. साधारण जनता के हित में
  2. अनुसूचित जनजातियों के हित के संरक्षण के लिए

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महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय

1. एन. बी. खरे बनाम दिल्ली राज्य (N. B. Khare v. State of Delhi)

इस मामले में अपीलकर्ता को तीन महीने के लिए दिल्ली राज्य से बाहर जाने पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था, जो पूर्वी पंजाब जन सुरक्षा अधिनियम, 1949 के तहत जारी हुआ था। अपीलकर्ता ने इस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें दो मुख्य तर्क दिए गए—

  • यह आदेश केवल कार्यपालिका के व्यक्तिगत निर्णय पर आधारित है।
  • अधिनियम में निष्कासन (Exile) की अवधि निर्धारित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: न्यायालय ने दोनों तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार या सरकारी अधिकारी को आदेश जारी करने का अधिकार देना अनुचित नहीं है, खासकर आपातकालीन परिस्थितियों में। हालाँकि, ऐसा कानून जो किसी अधिकारी को मनमानी शक्ति प्रदान करे, वह वैध नहीं माना जाएगा। उदाहरण के तौर पर, “खतरनाक चरित्र” वाले व्यक्ति को किसी क्षेत्र से बाहर करने का अधिकार तभी वैध होगा जब “खतरनाक चरित्र” की स्पष्ट परिभाषा कानून में दी गई हो।

2. उत्तर प्रदेश राज्य बनाम कौशल्या (State of Uttar Pradesh v. Kaushalya)

इस मामले में याचिकाकर्ता ने आंध्र प्रदेश मोटर वाहन अधिनियम, 1944 के एक नियम को चुनौती दी, जिसके तहत स्कूटर चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह नियम उसके घूमने की स्वतंत्रता (Right to Move Freely) का उल्लंघन करता है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: न्यायालय ने कहा कि यह नियम सार्वजनिक हित में बनाया गया है और इसका उद्देश्य स्कूटर चालकों को दुर्घटनाओं से बचाना है। अनुच्छेद 19(5) के तहत सार्वजनिक हित में युक्तिसंगत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, इसलिए यह नियम वैध है।

निष्कर्ष

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(घ) नागरिकों को पूरे भारत में स्वतंत्र रूप से घूमने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। हालाँकि, यह पूर्णतः निरंकुश नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 19(5) के तहत साधारण जनता के हित और अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण हेतु उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। न्यायपालिका ने समय-समय पर विभिन्न मामलों में इस अधिकार की व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

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