भारत में राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रधान होता है वह देश का प्रथम नागरिक है। राष्ट्रपति का पद बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इसलिए संविधान में भी उन्हें कई सारी शक्तियां दी गई है भारत में संसदीय प्रणाली अपनाई गई है जिसमें राष्ट्रपति कार्यकारी प्रधान होता है लेकिन वास्तविक शक्ति मंत्रिमंडल के हाथ में होती है फिर भी राष्ट्रपति को काफी शक्तियां दी गई है राष्ट्रपति से संबंधित प्रावधान भारतीय संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 52 से 78 तक दिया गया है।
1 कार्यपालिका शक्ति (Executive power)
2 विधायक शक्तियां (Legislative power)
3 सैनिक शक्ति (Military Power)
4 कूटनीतिक शक्ति (Diplomatic power)
5 न्यायिक शक्ति (Judicial power)
6 वित्तीय शक्ति (Financial power)
7 आपातकालीन शक्ति (Emergency power)
कार्यपालिका शक्ति (Executive power) अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका की समझ शक्तियां राष्ट्रपति में निहित है भारत सरकार की समझ कार्यपालिका संबंधित कार्यवाही राष्ट्रपति के नाम से ही की जाती है राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों के अंतर्गत देश के प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति शामिल है जिसमें-
1.प्रधानमंत्री तथा उसकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति। 2.उच्च तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों।
3.राज्यों के राज्यपालों
4.भारतीय महान्यायवादी
5.भारत का नियंत्रक और महालेखा प्रशिक्षक
6.लोक सेवा आयोग के सभापति, सदस्यों की नियुक्ति 7.अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी 8) अनुसूचित और 8.पिछड़े वर्गों के लिए आयोग।
9.इसके साथ ही राष्ट्रपति इन अधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ उन्हें उनके पद से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हटाने की भी शक्ति रखता है।
महत्वपूर्ण केस
राम जवाया बनाम भारत संघ (1955) इस मामले में न्यायालय ने कहा कि हमारे संविधान में इंग्लैंड की संसदीय सरकार की प्रणाली को अपनाया गया है इसका मूल सिद्धांत यह है कि राष्ट्रपति कार्यपालिका का संवैधानिक प्रधान होता है और वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रीपरिषद में निहित होती है।
विधायी शक्ति (Legislative power) संसद का निर्माण लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति तीनों से मिलकर होता है इसलिए राष्ट्रपति को कई महत्वपूर्ण विधायि शक्तियां भी दी गई है राष्ट्रपति केंद्रीय विधानमंडल का एक आवश्यक अंग है राष्ट्रपति की विधायक शक्ति विधायि शक्तियों में निम्नलिखित शक्तियां दी गई हैं।
1.संसद के सत्र को आहुत्तत करना।
2.लोकसभा का विघटन करना।
3.अनुच्छेद 311 के अनुसार संसद के द्वारा दोनों सदनों से पारित होने वाले विधायक पर हस्ताक्षर करना अनुमति मिलने पर ही वह अधिनियम बनता है
4.कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं उसे पर अपने सुझाव के साथ सदन को पुनर्विचार के लिए वापस लौटना।
5. यदि किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में कोई असहमति होती है तो उसे सुलझाने के लिए अनुच्छेद 108 के अनुसार दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाना।
6. अनुच्छेद 304 के अनुसार व्यापार वाणिज्य की स्वतंत्रता पर निबंधन लगाने वाला राज्य का कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना राज्य विधानमंडल में पेश नहीं किया जा सकता।
7. अनुच्छेद 80 के अनुसार राष्ट्रपति ऐसे 12 व्यक्तियों को राज्यसभा में नाम निर्देशित करता है जो साहित्य, कला, विज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या अनुभव रखते हो।
8. अनुच्छेद 123 के अनुसार अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
महत्वपूर्ण केस।
डी सी वाधवा बनाम बिहार राज्य इस मामले में बिहार में 1967 से 1981 के दौरान 256 अध्यादेश जारी किए गए और विधानमंडल द्वारा अनुमोदित किए बिना ही उन अध्यादेशों को बार-बार जारी करके 14 वर्षों तक जीवित रखा गया उच्चतम न्यायालय की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा कि अध्यादेश का प्रयोग असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए ना कि किसी राजनीतिक उद्देश्यों से।
वित्तीय शक्ति (Financial power) राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियों में निम्नलिखित शक्ति आती है।
1.अनुच्छेद 112 के अनुसार हर वित्तीय वर्ष के संबंध में संसद के दोनों सदनों के सामने वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) पेश करना।
2. अनुच्छेद 115 के अनुसार संसद के दोनों सदनों के सामने अनुपूरक बजट (Supplementary budget) पेश करना।
3. अनुच्छेद 113 के अनुसार किसी भी वित्तीय विधेयक को पेश करने के लिए सिफारिश करना।
सैनिक शक्ति (Military Power)-राष्ट्रपति चुकी देश के प्रतिरक्षा बलों का सर्वोच्च सेनापति है इसलिए इस शक्ति के अंतर्गत राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियां दी गई है।
1.युद्ध की घोषणा करना।
2.शांति स्थापित करना।
लेकिन इस शक्ति के प्रयोग को संसद विधि द्वारा विनियमित करती है इस प्रकार राष्ट्रपति की सैनिक शक्ति उसके कार्यपालिका शक्ति के अधीन है जिसका प्रयोग वह मंत्री परिषद की सलाह से करता है।
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