विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनिया अध्याय 2 धारा 27से लेकर 30 तक संवादों के विखंडन से संबंधित प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है धारा 27 और 28में यह बताया गया है कि किन परिस्थितियों में खंडन की कार्यवाही सफलता से की जा सकती है
धारा 27 में दो खंड है
खान1 जिसमें उन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है जिसमें संविदा को विखंडित किया जा सकता है
लेकिन खंड 2 में उन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है जिसमें संविदा के विखंडन को न मंजूर किया जा सकता है।
खंड 1 के तहत परिस्थितियa निम्नलिखित है
1. जब संविदा वादी के विकल्प पर शून्यकरणीय हो या पर्यावसेय हो यानि जो परिवर्तन करने योग्य हो
जब संविदा अवैध हो और अवैधता के कारण संविदा को देखते ही स्पष्ट न हो पा रहे हो और बड़ी के मुकाबले प्रतिवादी अधिक दोषी हो
परिस्थिति A पर उदाहरण
A B को भूमि बेचता है उस भूमि में मार्ग का अधिकार है जिसके बारे में A को प्रत्यक्ष व्यक्तिगत जान किंतु वह b से छुपता है तो इसी स्थिति में संविदा को विखंडित करने का हकदार है
परिस्थिति B
A अधिवक्ता है जो अपने मुवक्किल B को जो एक हिन्दू विधवा है लेनदारों को धोखा देने के उद्देश्य से संपति अपने नाम करने के लिए उत्प्रेरित करता है। इसी स्थिति में दोनों दोषी है लेकिन इसी स्थिति में B हस्तांतरण ko रदद करने के हकदारनी है
उपधारा 2के तहत विखंडन का अधिकार निम्न परिस्थितियों
अनुमोदन: जब प्रतिवादी द्वारा विखंडन का अधिकार खो देगा यदि वह अधिकार का पता लगने के बाद भी संविदा का अनुमोदन करता है और ये अनुमोदन अभिव्यक्ति भी हो सकता है और विवाछित भी
2.जब मूल स्थिति को वापस करना असंभव हो
विखंडन का अधिकार तब छीन जाता है जब पक्षकारों की स्थिति में इतना परिवर्तन आजाए कि वह अपने मूल स्थिति में वापस ना लाएं जा सकते हो तब ऐसी स्थिति में संविदा के विखंडन को नामंजूर किया जा सकता है
3. जब व्यक्तियों के अधिकारों पर हस्तक्षेप हो तब इसे अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना विखंडन नहीं किया जा सकता
4. विभाजन विखंडन का उपाय तब भी नहीं दिया जाता जब वादी संविदा के एक भाग का विखंडन चाहता है और वह भाग शेष भाग संविदा के विखंडन नहीं किया जा सकता।