Specific Relif ACT (1663 ka 47) की आवश्यकता क्यों पड़ी?

परिचय 

किसी भी आधुनिक राष्ट्र में लोगों को उनके जीवन और संपत्ति की सुरक्षा घोषित करना ही पर्याप्त नहीं है

कोई भी व्यक्ति या समाज या राष्ट्र तब तक पूर्ण नहीं होगा।

 जब तक पीड़ित पक्षकारों को पीड़ा के बदले उपचार प्राप्त न हो सके। सामान्य तौर पर, कोई भी विधि , अधिकार और कर्तव्य परिभाषित करती है वह उसके उल्लंघन के लिए उपाय भी करती है 
 उदाहरण, के तौर पर , संविदा अधिनियम, अपकृत्य विधि, पीड़ित पक्षकारों के प्रतिकार उपलब्ध कराती है।
लेकिन, ये विधियां अपने आप में पूर्ण नहीं हो पाती 
तब हमें ऐसे अधिनियम की आवश्यकता पड़ती है जिसका उद्देश्य विशेष विनिर्दिष्ट निबंधनों के अनुसार अनुतोष उपलब्ध कराया जा सके।
 उदाहरण, के तौर पर - एक अस्पताल अपने आवश्यकताओं की पूर्ति चाहता है न कि आपूर्ति करता के विफल होने के लिए प्रतिकार

और यह अनुतोष संविदा अधिनियम के तहत प्राप्त नहीं हो सकती थी। इसलिए, संविदाओं की विनिर्दिष्ट अनुपालन के लिए विर्निदिष्ट अनुतोष अधिनियम का निर्माण किया गया।

विनिर्दिष्ट अनुतोष का तात्पर्य है
 पीड़ित पक्षकार को वही वस्तु देने का आदेश किया जाता है जो वास्तव में उसकी है और उसको मिलनी चाहिए। और ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित पक्षकार को क्षतिपूर्ति लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कुछ  ऐसी  संविदाएं होती है जहां विशिष्ट पालन का अनुतोष देना आवश्यक होता है:- 
 1.जहां मौद्रिक रूप से पैसा पर्याप्त नहीं है ।
 2.मौद्रिक प्रतिकर प्राप्त करना आवश्यक हो ।

प्रकृति 
 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम प्रक्रियात्मक विधी है
केस - आधुनिक स्टील लिमिटेड बनाम उड़ीसा खनीज प्राइवेट लिमिटेड 2007
इस वाद में न्यायालय ने विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम को प्रक्रियात्मक विधि माना है ऐसा मानने के पीछे न्यायालय ने दो कारण दिए 
1.विनिर्दिष्ट अनुरोध अधिनियम 1963 का मूल उद्देश्य अनुतोष से संबंधित विधि को परिभाषित और संशोधित करना है 
2.विशेष प्रकार के अनुतोष इस अधिनियम में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होंगे।

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम विवेकाधिकार प्रकृति की है अर्थात यह न्यायालय पर निर्भर करता है कि न्यायालय विशेष प्रकार का अनुतोष प्रदान करने के लिए विशेष कारण पर विचार करेगा लेकिन 2018में इसमें संशोधन किया गया जिसके तहत विनिर्दिष्ट अनुपालन को बाध्यकरी (mendetory )बनाया गया
क्षेत्र
विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम का क्षेत्र बहुत व्यापक है तथा इसके अंतर्गत सिविल विवादों को शामिल किया जाता है जैसे ,विक्रय की संविदा,भागीदारी, इंटेलेक्चुअल बौद्धिक संपदा,न्याय आदि जो न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है।



DIPANKARSHIL PRIYADARSHI

Dipankarshil Priyadarshi Law Student | Legal Writer Hi! I'm Dipankarshil Priyadarshi, a BA-LLB student from Lucknow University. I am passionate about law, legal writing, and sharing useful legal knowledge. Through this blog, I share simple and informative content about law, legal concepts, case laws, and topics that can help law students understand the legal field in an easy way.

Post a Comment

Previous Post Next Post