ईस्ट इंडिया कंपनी और प्रारंभिक चार्टर एक्ट्स (1600 – 1773


मैं  Dipankarshil Priyadarshi आप है thefreshlaw के प्लेटफॉर्म पर ,आज का लेख है ईस्ट इंडिया कंपनी और उसके चार्टर एक्ट्स के बारे में, जो भारत के संवैधानिक विकास को समझने में बहुत महत्वपूर्ण हैं।


ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना (1600)
ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना दिसंबर 1600 में ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम द्वारा जारी चार्टर के माध्यम से की गई थी।
इस चार्टर ने कंपनी को पंद्रह वर्षों तक पूर्वी देशों (East Indies) के साथ व्यापार करने का विशेष एकाधिकार (monopoly) अधिकार दिया।
यह कंपनी लंदन के व्यापारियों द्वारा बनाई गई थी और धीरे-धीरे भारत सहित एशिया के कई हिस्सों में व्यापार करने लगी।

कंपनी का प्रारंभिक कार्यक्षेत्र
भारत में कंपनी ने अपना पहला व्यापारिक केंद्र सूरत (गुजरात) में स्थापित किया।
धीरे-धीरे कंपनी ने बंबई (मुंबई), मद्रास (चेन्नई) और कलकत्ता (कोलकाता) में अपनी प्रेसिडेंसी (Presidency) स्थापित की।
इन्हीं तीन प्रेसिडेंसी से कंपनी ने भारत में अपना प्रभाव बढ़ाया।

चार्टर एक्ट 1726
जैसे-जैसे कंपनी का व्यापार बढ़ा, ब्रिटेन की संसद ने 1726 का चार्टर एक्ट पारित किया।
इस एक्ट ने कलकत्ता, मद्रास और बंबई के गवर्नरों को अपनी-अपनी प्रेसिडेंसी में नियम और कानून बनाने की शक्ति दी।
पहले तक सारे नियम कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (लंदन में बैठे निदेशक मंडल) से आते थे, लेकिन अब स्थानीय गवर्नरों को अधिकार दिया गया।

यह परिवर्तन कंपनी के प्रशासनिक विकेंद्रीकरण (Decentralisation) की शुरुआत थी।

> ध्यान रहे – 1600 और 1726 के ये चार्टर एक्ट्स सिर्फ कंपनी से संबंधित थे। अभी तक इनका भारत के संवैधानिक विकास से सीधा संबंध नहीं था।

राजनीतिक सत्ता की ओर कदम (1765)
प्लासी का युद्ध (1757) और बक्सर का युद्ध (1764) जीतने के बाद कंपनी ने भारतीय राजनीति में प्रवेश कर लिया।
1765 की इलाहाबाद संधि के बाद कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी (राजस्व वसूली का अधिकार) मिल गया।
यहीं से कंपनी केवल व्यापारिक संस्था न रहकर, एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरने लगी।
बंगाल में कंपनी ने द्वैध शासन प्रणाली (Dual Government) स्थापित की, जिसमें –
कंपनी राजस्व वसूलती थी।
नवाब प्रशासन और न्याय की देखरेख करता था।
यह व्यवस्था भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के कारण विफल हो गई।

रेगुलेटिंग एक्ट 1773
कंपनी के भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट को देखते हुए ब्रिटेन की संसद ने रेगुलेटिंग एक्ट 1773 पारित किया।
यह पहला मौका था जब ब्रिटेन की संसद ने भारत के शासन-प्रशासन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया।

मुख्य प्रावधान :
1. बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल बनाया गया।
वारेन हेस्टिंग्स पहले गवर्नर-जनरल बने।
बंबई और मद्रास के गवर्नर अब कुछ मामलों में बंगाल के गवर्नर-जनरल के अधीन हो गए।
2. भारत में कंपनी की कार्यवाही की निगरानी के लिए ब्रिटेन की संसद ने एक सुपरवाइजरी कमेटी बनाई।
3. कंपनी के कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की शक्तियों पर भी आंशिक नियंत्रण लगाया गया।

निष्कर्ष
1600 का चार्टर एक्ट – कंपनी को व्यापार का विशेषाधिकार मिला।
1726 का चार्टर एक्ट – प्रेसिडेंसी के गवर्नरों को कानून बनाने की शक्ति मिली।
1765 की इलाहाबाद संधि – कंपनी को दीवानी अधिकार मिले, राजनीति में प्रवेश हुआ।
1773 का रेगुलेटिंग एक्ट – ब्रिटेन की संसद ने पहली बार भारत के प्रशासन को नियंत्रित किया।

यहीं से भारत में अंग्रेज़ी शासन की नींव रखी गई और संवैधानिक विकास की नई यात्रा शुरू हुई।



DIPANKARSHIL PRIYADARSHI

Dipankarshil Priyadarshi Law Student | Legal Writer Hi! I'm Dipankarshil Priyadarshi, a BA-LLB student from Lucknow University. I am passionate about law, legal writing, and sharing useful legal knowledge. Through this blog, I share simple and informative content about law, legal concepts, case laws, and topics that can help law students understand the legal field in an easy way.

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