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Showing posts from February, 2024

अब तो यह स्पष्ट है कि मंदिर नहीं अस्पताल जरूरी है

जरूरी क्या है?- अब तो यह स्पष्ट है कि मंदिर नहीं अस्पताल जरूरी है........          ये रंगे सियार भी अद्भुत हैं। एक रंगा पत्रकार है अमिश देवगण जो चिल्ला -चिल्ला के कह रहा था कि जो राम मंदिर जायेगा उसे अस्पताल जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी लेकिन यह क्या तुलसी पीठाधीश्वर एवं तथाकथित जगतगुरू स्वामी रामभद्राचार्य सीने में दर्द के बाद इस अस्पताल से उस अस्पताल भागम - भाग मचाए हुए हैं जबकि ये मंदिर से ही लौटे था।         यह रामभद्राचार्य राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में भी गए था और इनका पेशा ही रामकथा कहना है फिर इनके उपर तो राम जी की डबल कृपा होनी चाहिए।इस अंधे संत ने यह भी कह रखा है कि यह राम जी से वार्ता करते हैं और एक बार पेशाब लगने पर रामजी इसका पेशाब करवाये थे, फिर सीने में दर्द पर अस्पताल क्यो पहुंच गए?          यह कथित संत रामभद्राचार्य ने ही कहा था -"मरे मुलायम - कांशीराम,प्रेम से बोलो जयश्रीराम"।            यह कथित संत जातिवादिता के नाते न केवल मशहूर हैं बल्कि मगरुर भी हैं। सीने...