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Showing posts from November, 2023

संविधान की प्रस्तावना क्या है हिंदी में समझे

उद्देशिका (Preamble) प्रस्तावना  संविधान की प्रस्तावना एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो संविधान के मूल सिद्धांतों और उद्देश्यों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। यह संविधान के माध्यम से राष्ट्र की स्थापना और लक्ष्यों को व्यक्त करती है। यहाँ भारतीय संविधान की प्रस्तावना का विश्लेषण और व्याख्या प्रस्तुत है: --- 1. प्रस्तावना का पाठ "हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा इसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता; सुनिश्चित करने के लिए; तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता को बढ़ाने के लिए, दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में 26 नवंबर, 1949 ई० को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।" 2. प्रस्तावना का उद्देश्य प्रस्तावना संविधान का परिचय है, जो यह स्पष्ट करती है कि भारतीय संविधान किन सिद्धांतों और उद्देश्यों के आधार पर बना है...

लोकतंत्रात्मक गणराज्य का अर्थ व्याख्या हिंदी में

लोकतंत्रआत्मक गणराज्य का अर्थ 'लोकतंत्रात्मक '  :  शब्द का तात्पर्य ऐसी सरकार से है जिसका समूचा प्राधिकार जनता में निहित होता है और जो जनता के लिए तथा जनता द्वारा स्थापित की जाती है देश का प्रशासन सीधे जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है और यह प्रतिनिधि अपने प्रशासकीय कार्यों के लिए जनता के प्रति ही उत्तरदाई होते हैं प्रत्येक 5 वर्ष के बाद जनता नए प्रतिनिधियों को निर्वाचित करती है इसी उद्देश्य के लिए संविधान प्रत्येक वयस्क नागरिकों को मताधिकार (Franchise)प्रदान करता है लोकतंत्रात्मक सरकार के निर्माण के लिए मताधिकार अपरिहार्य है और मताधिकार का सही प्रयोग करके लोकतंत्रआत्मक सरकार को सफल बनाने के लिए नागरिकों को शिक्षित होना भी अत्यंत आवश्यक है ऐसी लोकतांत्रिक सरकार का परम कर्तव्य समानता न्यायस्वतंत्रता तथा बंधुतों की भावना का सृजन करके एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है हमारे संविधान की प्रस्तावना भी इसी पुनीत उद्देश्य की प्राप्ति का आवाहन करती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

                        ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सन् 1947 का वर्ष भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों (किसीअच्छी बात को सोने केअक्षरों मेंं लिखें जाने से हैं) में लिखा जायेगा। इसी वर्ष भारत अपनी सदियों की दासता (समाज)से मुक्त हुआ था। इतने बलिदान के फलस्वरूप अर्जित इस स्वतन्त्रता को संजोये रखने के लिए इसे अभी बहुत कुछ करना था। सर्वप्रथम देश के प्रशासन का महत्त्वपूर्ण कार्य सामने था, जिसके लिए हमारे नेताओं को एक सुदृढ़ ढाँचा निर्मित करना था। भारत को एक संविधान की रचना करनी थी। यह कार्य सरल नहीं था। अनेक बाधाएँ थीं। इन सबके बावजूद संविधान निर्मात्री सभा ने अथक परिश्रम तथा कार्यकुशलता का परिचय दिया और एक सर्वमान्य संविधान की रचना करने में सफल रही। स्वतन्त्रता के पवित्र दिन के पश्चात् दूसरा ऐतिहासिक महत्व का दिन था 26 जनवरी, 1950; जब भारत का संविधान लागू किया गया जिसने भारत को संसार के समक्ष एक नये गणतन्त्र के रूप में प्रस्तुत किया। संविधान की परिभाषा - संविधान से तात्पर्य ऐसे दस्तावेज से है जिसकी एक विशिष्ट विधिक पवित्रता होती है जो राज...