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संविदाओं का विनिर्दिष्ट पालन specific performance of contract

🔷 "अब समझते हैं कि विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 के अध्याय 2 में संविदाओं के वास्तविक पालन (Specific Performance) से जुड़ी क्या-क्या व्यवस्थाएँ दी गई हैं, और न्यायालय किस आधार पर ऐसे पालन का आदेश दे सकता है। यह अध्याय विशेष रूप से धारा 9 से 24 तक फैला हुआ है, जो संविदाओं के पालन से जुड़े सिद्धांतों, अपवादों और शर्तों को विस्तार से स्पष्ट करता है।"

संविदाओं का विनिर्दिष्ट पालन (Specific Performance) एक प्रकार का सांविधिक अनुतोष (Statutory Remedy) है, जिसे न्यायालय संविदा भंग होने की स्थिति में प्रदान करता है। इस उपाय के तहत न्यायालय प्रतिवादी को संविदा की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य कर सकता है।

👉 भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 2(h) के अनुसार:

> “संविदा वह करार है जो विधि द्वारा प्रवर्तनीय होता है।”
जब दो पक्षों के बीच संविदा संपन्न हो जाती है, तो दोनों के बीच कानूनी बाध्यता (Legal Obligation) उत्पन्न हो जाती है। यदि वह पक्ष, जिस पर पालन की जिम्मेदारी है, उसे पूरा नहीं करता है, तो दूसरा पक्ष:

1. या तो संविदा के वास्तविक पालन (Specific Performance) की माँग कर सकता है,
2. या फिर पालन न होने पर हर्जाना या अन्य राहत (Alternative Relief) की माँग कर सकता है।

क़ानूनी हर्जाने (Damages) के लिए वाद भारतीय संविदा अधिनियम के तहत लाया जाता है,
जबकि संविदा के विशेष पालन के लिए वाद विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 के अंतर्गत लाया जाता है।
इस अधिनियम में धारा 9 से लेकर धारा 24 तक संविदा आधारित विशेष पालन से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।

📘 धारा 9 – संविदा आधारित वादों में प्रतिरक्षाएँ (Defences in Suits Based on Contracts)

धारा 9 कहती है कि जब कोई व्यक्ति किसी संविदा के आधार पर न्यायालय में अनुतोष की माँग करता है,
तो प्रतिवादी (Defendant) को यह अधिकार प्राप्त होता है कि वह अपने बचाव (Defence) में
संविदा से संबंधित किसी भी वैध विधिक आधार (Legal Ground) को प्रस्तुत कर सकता है —
जब तक कि अधिनियम के किसी विशेष अध्याय में इसके विपरीत उपबंध न हो।

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