परिचय- यह लेख लखनऊ विश्वविद्यालय कानून का छात्र दीपांकारशील प्रियदर्शी द्वारा लिखा गया है जिसमें राज्य के महाधिवक्ता की शक्तियां और कार्य और विशेष अनुच्छेद के बारे में प्रावधान है।
महाधिवक्ता (Advocate General)-राज्य के महाधिवक्ता के बारे में सविंधान के अनूच्छेद 165 में प्रावधान किया गया है। वह राज्य का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होता है और जिस तरह से भारत सरकार के लिए महान्यायवादी का पद होता है उसी प्रकार से राज्य के लिए राज्य के महाधिवक्ता का पद होता है।
महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है।
योग्यता- महाधि वक्ता के पद पर नियुक्ति होने केलि ए व्यक्ति में उच्चन्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता होनी चाहिए। साधारण शब्दों में महाधिवक्ता में निम्नलि खित योग्यताएं होनी जरूरी है-
1) वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
2) वह 5 वर्ष तक न्यायिक अधिकारी या उच्च न्यायालय में10 वर्षों तक वकालत करने का अनभुव होना चाहिए।
महाधिवक्ता का कार्यकाल- वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंतर्यं अपने पद पर रहता है राज्यपाल के द्वारा उसे किसी भी समय उसके पद से हटाया जा सकता है उसे हटाने के विषय में सविंधान में किसी प्रक्रिया का प्रावधान नहीं है राज्यपाल को अपना त्यागपत्र देकर अपना पद छोड़ सकता है
महाअधिवक्ता का पारिश्रमिक संविधान में उसके पारिश्रमिक के बारे में कोई प्रावधान नहीं है उसे वहीं प्राइम श्रमिक मिलता है जो राज्यपाल द्वारा तय किया जाता है।
महाधिवक्ता के कार्य
1.महाधिवक्ता चुकी राज्य का मुख्य कानूनी अधिकार होता है इस नाते उसके कार्य निम्नलिखित हैं।
2.राज्य सरकार को विधि संबंध ऐसे विषय पर सलाह देना जो राज्यपाल द्वारा उसे सोपा गया है दूसरा विधिक प्रकृति के ऐसे अन्य कर्तव्य का पालन करना जो राज्यपाल द्वारा सौंप गए हो।
3.संविधान या किसी अन्य विधि द्वारा प्रदान किए गए कार्य को पूरा करना।
महाधिवक्ता के अधिकार
1.राज्य का महाधिवक्ता किसी न्यायालय के सामने सुनवाई का अधिकार है
2.अनुच्छेद 177 के अनुसार राज्य का महाधिवक्ता विधानमंडल के दोनों सदनों या संबंधित समिति में बिना मतदान के बोलने का और भाग लेने का अधिकार रखता है।
3. उसे वे सभी विशेषाधिकार और भत्ते मिलते हैं जो विधानमंडल के किसी सदस्य को मिलते हैं
इस तरह भारत के प्रत्येक राज्य में अलग-अलग
महाधिवक्ता होते हैं महाधिवक्ता सभी कानूनी मामलों में
राज्य सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार होता है राज्य में महाधिवक्ता की वह स्थिति होती है जो भारत में महान्यायवादी की होती है
महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता के बीच अंतर
1) महान्यायवादी के संबंध में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 में प्रावधान किया गया है जबकि राज्य के महाधिवक्ता के संबंध में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 में प्रावधान किया गया है
2)संविधान का अनुच्छेद 88 महान्यायवादी को सदन में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार देता है। जबकि अनुच्छेद 177 राज्य महाधिवक्ता को विधानमंडल की कार्रवाई में भाग लेने और बोलने का अधिकार देता है
3) महान्यायवादी भारत का मुख्य कानूनी अधिकारी होता है जबकि महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होता है। 4) केंद्र सरकार के कानूनी मामले महान्यायवादी के पास भेजे जाते हैं जबकि राज्य के कानूनी मामले महाधिवक्ता के पास भेजे जाते हैं।
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