इस सिद्धांत का अर्थ विभाजन का सिद्धांत विवरण 13 से संबंधित है जब किसी अधिनियम का कोई भाग और असंवैधानिक होता है तब प्रश्न यह है कि क्या उस संपूर्ण अधिनियम को शून्य घोषित किया जाएगा या केवल उसके अवैध भाग को ही शून्य घोषित किया जाएगा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस सिद्धांत के पृथक्करण के सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया है यदि किसी अधिनियम का अवैध भाग उसके शेष भाग से बिना विधान मंडल के कार्य या अधिनियम के मूल संप्रदाय से अलग हो सकता है तो केवल मूल अधिकार से शून्य वाला भाग ही वैध है संपूर्ण अधिनियम को घोषित नहीं किया गया |
केस ए के गोपालन बनाम मद्रास राज्य 1950
इस मामले में दंडात्मक निषेध अधिनियम 1950 की धारा 14 की धारा 14 को चुनौती दी गई थी, जिसमें किसी व्यक्ति के अपराधी की विधि के आधार पर जांच की गई थी, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की धारा 14 को अवैध निषेध अधिनियम की धारा 14 को चुनौती दी गई थी। सुरक्षित। इस धारा को अलग कर देने से अधिनियम की प्रकृति और उसके उद्देश्य में कोई परिवर्तन नहीं होगा इसलिए धारा 14 को अवैध घोषित कर दिया गया है से अधिनियम के शेष भाग की विधिमान्यता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा |
केस मुंबई राज्य बनाम बलसारा 1951
इस मामले में मुंबई और प्रान्त निषेध अधिनियम 1949 के कुछ अपबंधों और संवैधानिक घोषित किये जाने के बाद शेष अधिनियम पर कोई प्रभाव नहीं डाला गया और वह वैध बना रहा
केस कीहोतो होलोहां बनाम जाचिलु 1993
इस मामले में दल परिवर्तन अधिनियम के द्वारा संविधान में वर्णित संविधान अनुसूची के पैरा 7 को अवैध घोषित किया गया है। लेकिन, यह निर्णय दिया गया कि उन्हें पूरा अधिनियम हटा दिया गया, कोई प्रभाव नहीं डाला गया और वह विधिमान्य नहीं बने रहेंगे | पैरा 7 को इस कारण से अवैद्यमान्य को घोषित कर दिया गया क्योंकि इसके उपाध्यक्ष के निर्णय दल के प्रश्न को अंतिम रूप से बदल दिया गया था।
इस सिद्धांत का अपवाद
यदि अवैध भाग वैध से इस प्रकार हटा दिया गया है कि वैध भाग हटा दिया गया है तो अधिनियम का उद्देश्य विफल हो गया है या शेष भाग का कोई स्वतंत्र दृष्टिकोण नहीं रखा गया है तो न्यायालय पूरे अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर देगा।
केस रोमांस थापर बनाम मद्रास राज्य 1950
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां संविधान द्वारा सीमा के अंदर या बाहर दोनों तरह के निबंध मौजूद हैं, वहां ऐसी व्यापक भाषा है, जहां दोनों को अलग-अलग करना संभव नहीं है। संपूर्णअधिनियम को ही वैध घोषित किया जाएगा।
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