बालिका दिवस: बालिकाओं के अधिकार और सशक्तिकरण
बालिका दिवस बालिकाओं के लिए प्रेरणा का एक ऐसा अवसर है, जो उन्हें अपने लक्ष्य प्राप्त करने में प्रोत्साहित करता है। यह दिवस समाज में लड़कियों के अधिकारों और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
इस दिन को मनाने का मुख्य मकसद लड़का और लड़की के बीच होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। बालिका दिवस केवल लड़कियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज में यह संदेश फैलाया जाता है कि लड़कियों और लड़कों की क्षमता में कोई अंतर नहीं है।
इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसी दिन देश की पहली महिला प्रधानमंत्री, जिन्हें आयरन लेडी के नाम से भी जाना जाता है, श्रीमती इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।
बालिकाओं के सशक्तिकरण हेतु योजनाएं
लड़कियों को समान अवसर और अधिकार प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने अनेक योजनाएं चलाई हैं। इनमें से कुछ प्रमुख योजनाएं हैं—
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
- सुकन्या समृद्धि योजना
- बालिका समृद्धि योजना
- मुख्यमंत्री राजश्री योजना
- मुख्यमंत्री लाडली योजना
- सीबीएसई उड़ान योजना
- बालिकाओं के लिए निशुल्क या रियायती शिक्षा
- कॉलेज और विश्वविद्यालय में महिलाओं के लिए आरक्षण
- माध्यमिक शिक्षा के लिए बालिकाओं को प्रोत्साहन की राष्ट्रीय योजना
- मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना
बालिका दिवस की शुरुआत और उद्देश्य
भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी।
उद्देश्य:- बालिकाओं को सहायता और अवसर प्रदान करना।
- बालिकाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
- बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के महत्व पर जोर देना।
- लिंग आधारित पूर्वाग्रहों को समाप्त करना।
- बालिकाओं के सामने आने वाली असमानताओं के बारे में जागरूकता फैलाना।
- घटते लिंगानुपात और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए समाज को जागरूक करना।
📌 बालिका दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि यह समाज को यह याद दिलाने का अवसर है कि जब तक लड़कियों को बराबरी के अधिकार, शिक्षा और सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।