देश हमारा, प्राणों से प्यारा – भारत की कहानी शब्दों में


सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा

लेखक: दीपांकर प्रियदर्शी, एलएलबी छात्र, लखनऊ विश्वविद्यालय

रूपरेखा

  1. प्रस्तावना
  2. हमारे देश का नामकरण
  3. भारत की सीमाएं
  4. विभिन्न धर्म का संगम
  5. भारत का प्राकृतिक सौंदर्य
  6. महापुरुषों की धरती
  7. भारत के आदर्श
  8. उपसंहार

प्रस्तावना

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि "यदि पृथ्वी पर ऐसा कोई देश है, जिसे हम पुण्यभूमि कह सकते हैं; यदि कोई ऐसा स्थान है, जहां पृथ्वी के सब जीव को अपना कर्म फल भोगने के लिए आना पड़ता है; यदि कोई ऐसा स्थान है, जहां भगवान को प्राप्त करने की आकांक्षा रखने वाले जीव मात्र को आना होगा; यदि कोई ऐसा देश है, जहां मानव जाति के भीतर क्षमा, धृति, दया, शुद्धता आदि सदवृत्तियों का अपेक्षाकृति अधिक विकास हुआ है; तो मैं निश्चित रूप से कहूंगा की हमारी मातृभूमि भारतवर्ष ही है।"

भारत देश हमारे लिए स्वर्ग के समान सुंदर है। इसने हमें जन्म दिया है। इसकी गोद में पालकर हम बड़े हुए हैं। इसके अन्नजल से हमारा पालन पोषण हुआ है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम इसे प्यार करें, इसे अपना समझें तथा इस पर सर्वस्व न्योछावर कर दें।

हमारे देश का नामकरण

हमारे देश का नाम भारत या भारतवर्ष है। पहले इसका नाम आर्यावर्त था। कहा जाता है कि महाराज दुष्यंत और शकुंतला के न्यायप्रिय पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत प्रसिद्ध हुआ। हिंदू बाहुल्य होने के कारण इसे हिंदुस्तान भी कहा जाता है।

भारत की सीमाएं

आधुनिक भारत उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पूर्व में असम से लेकर पश्चिम में गुजरात तक फैला हुआ है। उत्तर में भारत माता के सिर पर हिममुकुट के समान हिमालय सुशोभित है तथा दक्षिण में हिंद महासागर इसके चरणों को निरंतर धोता रहता है।

विभिन्न धर्म का संगम

मेरा प्यारा भारत संसार के बड़े राष्ट्रों में से एक है और यह संसार का सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक राष्ट्र है। जनसंख्या की दृष्टि से इसका विश्व में दूसरा स्थान है। यहां पर प्राय सभी धर्म के लोग मिलजुल कर रहते हैं। यद्यपि यहां हिंदुओं की संख्या सबसे अधिक है, फिर भी मुसलमान, ईसाई, फारसी, यहूदी, बौद्ध, जैन आदि भी इस देश के निवासी हैं और उन्हें न केवल समान अधिकार प्राप्त है, बल्कि सरकार द्वारा विशेष संरक्षण भी प्रदान किया जाता है।

सभी धर्म के मानने वालों को यहां अपनी-अपनी उपासना पद्धति को अपनाने की पूरी स्वतंत्रता है। सभी अपनी सामाजिक व्यवस्था के अनुसार अपना जीवन निर्वाह करते हैं। इस प्रकार भारत देश एक कुटुंब के समान है। इसे समस्त धर्म का संगम-स्थल भी कह सकते हैं।

भारत का प्राकृतिक सौंदर्य

भारत में प्राकृतिक सुंदरता ने अनुपम रूप प्रदर्शित किया है। चारों ओर फैली हुई प्राकृतिक सुंदरता यहां बाहर से आने वालों को मोहित करती रहती है। यहां हिमालय का पर्वतीय प्रदेश है, गंगा-यमुना का समतल मैदान है, पर्वत और समतल मिश्रित दक्षिण का पठार है और इसके साथ ही राजस्थान का रेगिस्तान भी है।

यह वह देश है जहां पर छह ऋतुएं समय-समय पर आती हैं और इस देश की धरती की गोद विविध प्रकार के अनाज, फलों एवं फूलों से भर देती है। भारत के पर्वत, निर्झर, नदियां, वन-उपवन, हरे-भरे मैदान, रेगिस्तान एवं समुद्री तट इस देश की शोभा के अंग हैं।

एक ओर कश्मीर से धरती का स्वर्ग दिखाई देता है तो दूसरी ओर केरल की हरियाली मन को स्वर्गिक आनंद से भर देती है। यहां अनेक नदियां हैं; जिनमें गंगा, यमुना, कावेरी, कृष्णा, नर्मदा, रवि, व्यास आदि प्रसिद्ध हैं। ये नदियां वर्ष भर इस देश की धरती को सींचती हैं, उसे हरा-भरा बनाती हैं और अन्न-उत्पादन में निरंतर सहयोग करती हैं।

महापुरुषों की धरती

भारत अत्यंत प्राचीन देश है। यहां पर अनेक ऐसे महापुरुषों का जन्म हुआ है जिन्होंने भारतीय समाज की कुप्रथाओं को समाप्त कर उसे नई सामाजिकता का माला पहनाया। भारतीय समाज में राजा राममोहन राय, भीमराव अंबेडकर जैसे अनेक महापुरुष आए।

विलियम बैंटिक जैसे सुधारक जिन्होंने समाज सुधार के क्षेत्र में कई कार्य किए, का नाम भी इतिहास में दर्ज है। इसी प्रकार बुद्ध और महावीर ने जन्म लेकर मानव को अहिंसा की शिक्षा दी। विक्रमादित्य, चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक, अकबर जैसे प्रतापी सम्राटों का नाम भी इतिहास में अमर है।

आधुनिक काल में गरीबों के मसीहा महात्मा गांधी, विश्व मानवता के प्रचारक रवींद्रनाथ टैगोर और शांति दूत पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म भी इसी महान देश में हुआ है।

भारत के आदर्श

भारत त्याग और तपस्या की भूमि है। प्राचीन काल से आज तक कितने ही महापुरुषों ने इस पवित्र भूमि की गरिमा बढ़ाते हुए अपनी इच्छाओं और विषय वासनाओं का त्याग किया। परतंत्रता के लंबे समय में भारत ने अपनी गरिमा और महानता को कुछ समय के लिए भुला दिया था; किंतु आस्था और संकल्प, विश्वास और कर्म, सत्य और धर्म इस धरती से कभी मिटे नहीं।

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि "हमारी मातृभूमि दर्शन, धर्म, नीति, विज्ञान, मधुरता, कोमलता अथवा मानव-जाति के प्रति अकपट प्रेमरूपी सद्गुणों को जन्म देने वाली है। यह सभी चीज अभी भी भारत में विद्यमान हैं। मुझे पृथ्वी के संबंध में जो जानकारी है, उसके बल पर मैं दृढ़ता पूर्वक कह सकता हूं कि इन चीजों में पृथ्वी के अन्य प्रदेशों के अपेक्षा भारत श्रेष्ठ है।"

उपसंहार

इस प्रकार धर्म, संस्कृति, दर्शन का संगम, संसार को शांति और अहिंसा का संदेश देने वाला, मानवता का पोषक तथा 'वसुधैव कुटुंबकम' का नारा देने वाला भारत भला किसको प्रिय न होगा! इसकी इन्हीं विशेषताओं के कारण महान शायर इकबाल ने कहा था –

सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा।
हम बुलबुले हैं इसकी यह गुलसता हमारा।

हमारी यह धरती धन्य है और इसमें रहने वाले भी अत्यंत सौभाग्यशाली हैं। भारत भूमि की महानता की कल्पना संस्कृत की इन पंक्तियों से की जा सकती है –

गायन्ति देवा: किलगीत कानी धन्यावस्तु ते भारतभूमिभागे।
स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते भवन्ति भूय: पुरुषा: सुरत्वात।।

DIPANKARSHIL PRIYADARSHI

Dipankarshil Priyadarshi Law Student | Legal Writer Hi! I'm Dipankarshil Priyadarshi, a BA-LLB student from Lucknow University. I am passionate about law, legal writing, and sharing useful legal knowledge. Through this blog, I share simple and informative content about law, legal concepts, case laws, and topics that can help law students understand the legal field in an easy way.

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