प्रेरणा की एक कविता

इस कविता में पिता की कर्मठता को बांया गया है। कविता को उचित लय हाव भाव तथा गति के साथ पदों बच्चों में कविता पढ़वा बच्चों में उनके ता बातचीत करें। हम सबके दो-दो हाथ हैं। पर पापा के दो हाथ खास क्यों हैं? इस बात पर विशेष रूप से चर्चा करें।

मेरे भी हैं दो-दो हाथ भैया के भी दो-दो हाथ पापा के भी दो-दो हाथ पर उनकी कुछ और ही बात। इन हाथों से मेरे पापा चिकनी मिट्टी गढ़ते हैं, इन हाथों में कलम थामकर संग-संग मेरे पढ़ते हैं।

इन हाथों से सेंक-सेंक कर कभी बनाते नरम-सी रोटी, कभी चिढ़ाते मुझे प्यार से खींच खींच कर मेरी चोटी। इन हाथों को पकड़-पकड़कर मैंने चलना सीखा है, इन हाथों की खिड़की से ही दुनिया भर को देखा है। लेकर इन हाथों का सहारा पेड़ों पर चढ़ जाती हूँ, रात को इन हाथों की थपकी से ही मैं सो जाती हूँ। मेरे पापा के दो हाथ

पर उनकी कुछ खास है बात

- अक्षय कुमार दीक्षित

DIPANKARSHIL PRIYADARSHI

Dipankarshil Priyadarshi Law Student | Legal Writer Hi! I'm Dipankarshil Priyadarshi, a BA-LLB student from Lucknow University. I am passionate about law, legal writing, and sharing useful legal knowledge. Through this blog, I share simple and informative content about law, legal concepts, case laws, and topics that can help law students understand the legal field in an easy way.

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