(1) स्वतः अभियोज्य अपकृत्य (Torts actionable per se) मान लीजिए आप के कोई मित्र निर्वाचन के लिए किसी निर्वाचन क्षेत्र से एम० एल० ए० या एम० पी० आदि के पद के लिए खड़े हों और आज आप उस निर्वाचन क्षेत्र का निवासी होने के नाते उनको वोट देने जायें पर निर्वाचन अधिकारी (Election Officer) आपको वोट देने से रोक दे और आप हताश होकर वापस लौट आयें। बाद में चुनाव का फल आने पर आपको ज्ञात हो कि जिस व्यक्ति को आप वोट देने गये थे वह विजयी घोषित हो गया है ऐसी दशा में आप यह अवश्य सोचेंगे कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा चोट देने से आपको या किसी को कोई क्षति नहीं पहुँची क्योंकि जिस व्यक्ति को आप वोट देना चाहते थे वह आप के वोट के बिना भी विजयी हो गया और इस प्रकार आपको कोई क्षति नहीं पहुँची, किन्तु फिर भी निर्वाचन अधिकारी पर क्षतिपूर्ति का दावा अपकृत्य विधि (Law of Tort) के अन्तर्गत कर सकते हैं क्योंकि उसने आपके वोट के अधिकार से आपको वंचित रखा है और इस प्रकार आपके विधिक अधिकार (Legal Rights) को भंग किया है।
(2) स्वत: अनभियोज्य (Per se not actionable)- इसके अतिरिक्त दूसरे कोटि के अपकृत्य वे हैं जो स्वतः अभियोज्य नहीं होते हैं। इन अपकृत्य में हम सभी क्षतिपूर्ति वसूल करने के लिए क्षतिकर्ता पर मुकदमा चला सकते हैं। जब हम यह प्रमाणित कर सकें कि अमुक कृत्य से हमें वास्तव में क्षति पहुँची है। उदाहरणार्थ भारत में मौखिक अपमानकारी वचन (Slander) इसी कोटि का अपकृत्य हैं, क्योंकि मौखिक रूप से अपमान करने वाले व्यक्ति पर हम सभी क्षतिपूर्ति का मुकदमा चला सकते हैं। जब हम यह प्रमाण प्रस्तुत कर सकें कि अमुक व्यक्ति के मौखिक अपमानकारी वचनों से हमें वास्तविक क्षति पहुँची है। इस प्रकार के अपकृत्य को हम वास्तविक क्षति की परिस्थिति में भी अभियोज्य में ही अभियोज्य अपकृत्य (Torts actionable on proof of actual damage) की कोटि में रखेंगे।
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Law of Torts