📢 सावधान! कृपया ध्यान दें
मेरा आप सभी से अनुरोध है कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते किसी भी ग्रुप व सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की धार्मिक अथवा राजनीतिक विवादों को जन्म देने वाली पोस्ट या किसी भी प्रकार की राजनीतिक चर्चा न करें।
ना ही इस प्रकार की किसी भी चर्चा पर अपने विवादित विचार दें। सोच-समझकर पोस्ट शेयर करें। चुनाव आयोग व प्रशासन की सोशल मीडिया पर पूरी नज़र है।
सोशल मीडिया का दुरुपयोग या नासमझी का प्रयोग आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। अतः आदर्श आचार संहिता के सभी नियमों का पालन करें।
❌ भूलकर भी न करें ये काम!
राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों को चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार की नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की मंजूरी के साथ काम करना होगा। चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार को आदर्श आचार संहिता के नियमों का पालन करना होता है।
यदि कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे दंड भी मिल सकता है।
📖 आदर्श आचार संहिता होती क्या है?
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने कुछ नियम बनाए हैं, जिन्हें आदर्श आचार संहिता कहा जाता है। लोकसभा या विधानसभा चुनाव के दौरान इन नियमों का पालन करना राजनीतिक दलों के लिए जरूरी होता है।
🕰 शुरुआत कब और कैसे हुई?
आदर्श आचार संहिता की शुरुआत सबसे पहले 1960 में केरल विधानसभा चुनाव में हुई थी।
इलेक्शन कमीशन ने 1962 के लोकसभा चुनाव में पहली बार राजनीतिक दलों को इन नियमों के बारे में बताया।
1967 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव से यह व्यवस्था लागू हो गई थी।
राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों को चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार की नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के कर्मचारियों की तरह काम करना होता है। चुनाव पूरा होने के बाद आचार संहिता हटा ली जाती है।
🚫 आचार संहिता के दौरान किन चीजों की मनाही है?
मंत्री सरकारी वाहनों का इस्तेमाल सिर्फ अपने निवास से कार्यालय तक कर सकते हैं
सरकारी खर्च पर चुनावी रैली नहीं की जा सकती
पेंशन फॉर्म जमा नहीं किए जा सकते
नए राशन कार्ड नहीं बनाए जा सकते
किसी भी काम का नया ठेका नहीं दिया जा सकता
नए टेंडर नहीं खोले जाएंगे
सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी पार्टी को लाभ पहुंचाने वाले आयोजन में नहीं होगा
सरकारी घोषणाएं, लोकार्पण, शिलान्यास आदि नए सिरे से नहीं किए जाएंगे (पहले से शुरू काम जारी रह सकते हैं)
मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा या किसी धार्मिक स्थल का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल नहीं
किसी सरकारी अधिकारी/कर्मचारी का ट्रांसफर बिना चुनाव आयोग की अनुमति के नहीं
सभा, जुलूस या लाउडस्पीकर के लिए स्थानीय पुलिस से लिखित अनुमति जरूरी
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नही
👥 आम जनता पर भी लागू
आचार संहिता सिर्फ राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है, यह आम नागरिकों पर भी लागू होती है।
यदि कोई अपने नेता के प्रचार में शामिल है, तो उसे भी इन नियमों का पालन करना होगा।
कोई नेता यदि आपको नियम तोड़ने के लिए कहे, तो आप आचार संहिता के नियमों का हवाला देकर मना कर सकते हैं।
अगर कोई प्रचार करते पकड़ा गया, तो कार्रवाई हो सकती है।
नोट;