Skip to main content

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 2 के अंतर्गत परिभाषित शब्दकोश


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023
 (2023 का अधिनियम संख्या 46) मे संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध जमानतीय और अजमानतीय अपराध अशमनीय और शमनीय  और इससे संबंधित अन्य अपराध की धाराओं को निम्नलिखित धाराओं में परिभाषित करती है जो निम्न है.....

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
संक्षिप्त नाम, 

परिभाषाएं।         धारा का शीर्षक

धारा 2(1)(क) "श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रानिक"
धारा 2(1)(ख) "जमानत"
धारा 2(1) (ग) "जमानतीय अपराध"
धारा 2 (1) (घ) "जमानतपत्र"
धारा 2 (1) (ङ) "बंधपत्र"
धारा 2(1) (च) "आरोप"
धारा 2(1) (छ) "संज्ञेय अपराध"
धारा 2(1) (ज) "परिवाद"
धारा 2(1)(झ) "इलैक्ट्रानिक संसूचना"
धारा 2(1) (ञ) "उच्च न्यायालय"
धारा 2(1) (ट) "जांच"
धारा 2(1) (ठ) "अन्वेषण"
धारा 2(1) (ड) "न्यायिक कार्यवाही"
धारा 2(1) (ढ) "स्थानीय अधिकारिता"
धारा 2(1) (ण) "असंज्ञेय अपराध"
धारा 2 (1) (त) "अधिसूचना"
धारा 2(1) (थ) "अपराध"
धारा 2(1) (द) "पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी" 
धारा 2(1) (ध) "स्थान"
धारा 2(1) (न) "पुलिस रिपोर्ट"
धारा 2 (1) (प) "पुलिस थाना"
धारा 2(1) (फ) "लोक अभियोजक"
धारा 2(1) (ब) "उपखण्ड"
धारा 2(1) (भ) "समन-मामला"
धारा 2(1) (म) "पीड़ित"
धारा 2 (1) (य) "वारण्ट-मामला"


■ संज्ञेय और असंज्ञेय अपराधः संज्ञेय अपराध वे अपराध हैं जिनके लिये  एक पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को बिना वारण्ट के गिरफ्तार कर सकता है, जैसे हत्या, बलात्कार, दहेज हत्या, आदि।
 असंज्ञेय अपराधं वे अपराध हैं जिनके लिये एक पुलिस अधिकारी बिना वारण्ट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकता हैं। जैसे रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी, जालसाजी, आदि।

■ जमानतीय और अजमानतीय अपराधः जमानतीय अपराध वे अपराध  हैं जिनमें जमानत अधिकार का मामला हैं, जैसे लोक उपताप, उपेक्षा या उतावलेपन से मृत्यु आदि। 

अजमानतीय अपराध वे अपराध हैं जिनमें जमानत अधिकार का मामला नहीं हैं, अपितु यह न्यायालय का विवेकाधिकार है: जैसे चोरी, डकैती, आपराधिक न्यासभंग आदि।

 ■अशमनीय और शमनीय अपराधः शमनीय अपराध वे अपराध हैं जिनमें - परिवादी और आरोपी समझौता कर सकते हैं और मामले को न्यायालय के - बाहर सुलझा सकते हैं, जैसे व्यभिचार, मानहानि, हमला, आदि। 

अशमनीय अपराध वे अपराध हैं जिनमें परिवादी और आरोपी समझौता नहीं कर सकते और मामले का निर्णय न्यायालय को करना होता हैं, जैसे हत्या, बलात्कार, अपहरण, आदि।

■ वारण्ट मामला  जो मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय अपराध से संबंधित मामला हैं।

■ परिवाद 
 
 1. परिवाद को भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिता की धारा 2 (ज) के अधीन परिभाषित किया गया हैं।

2. परिवाद एक ऐसी शिकायत हैं, जो मजिस्ट्रेट को मौखिक या लिखित रूप से की जाती हैं।

3. कोई परिवाद संज्ञेय अपराध या असंज्ञेय अपराध से संबंधित हो सकता है।

4. एक मजिस्ट्रेट किसी परिवाद पर अपराध का संज्ञान लेता हैं। परंतु प्रथम सूचना रिपोर्ट पर वह ऐसा नहीं कर सकते हैं।

5. किसी परिवाद में किसी पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट शामिल नहीं होती।

■ भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिता, 2023 की धारा 2(ट) "जांच" शब्द को परिभाषित करती हैं जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिता के अधीन मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा किये जाने वाले विचारण से भिन्न प्रत्येक जांच शामिल है जिसमें जांच एक मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा की जाती हैं न कि किसी  पुलिस अधिकारी द्वारा की जाती हैं।

■ भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिता, 2023 की धारा 2 (थ) में कहा गया हैं कि "अपराध" का अर्थ उस समय लागू किसी भी विधि द्वारा दण्डनीय कोई भी कार्य या चूक हैं और इसमें कोई भी कार्य शामिल हैं जिसके संबंध में पशु अतिचार अधिनियम, 1871 (1871 का 1) धारा 20 के अधीन परिवाद किया जा सकता हैं।
■ दंड प्रक्रिया संहिता धारा 2 (फ) लोक अभियोजक को परिभाषित करती हैं। "एक व्यक्ति जिसे दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 24 के अधीन नियुक्त किया गया हैं और इसमें वह व्यक्ति भी शामिल हैं जो लोक अभियोजक के निर्देशों के अधीन कार्य कर रहा हैं।"

Comments

Popular posts from this blog

संविधान और राज्य-व्यवस्था: समझें इन दोनों के बीच का बुनियादी अंतर

हेलो हेलो फ्रेंड्स! The Fresh Law में एक बार फिर आपका स्वागत है। आज की पोस्ट में हम बात करेंगे संविधान और राज्य-व्यवस्था की। यह दोनों शब्द सिविल सर्विस या किसी भी लॉ परीक्षा की तैयारी करने वालों के सिलेबस में आते हैं, लेकिन अक्सर इन्हें एक ही समझ लिया जाता है। जबकि, इन दोनों में गहरा अंतर है। आइए, इस क्लास के माध्यम से इसे विस्तार से समझते हैं। संविधान और राज्य-व्यवस्था एक नहीं हैं अगर आप यह मानकर चल रहे हैं कि संविधान और राज्य व्यवस्था एक ही चीज है, तो आप एक बड़ी गलती कर रहे हैं। यह दोनों भले ही एक-दूसरे से संबंधित हों, लेकिन दोनों अलग-अलग अवधारणाएं हैं। संविधान क्या है? 1. संविधान का सरल अर्थ मान लीजिए कि जैसे घर में कुछ परंपराएं, नियम और व्यवहार होते हैं जिनके आधार पर घर चलता है, वैसे ही किसी देश को चलाने के लिए भी एक संकलन की आवश्यकता होती है। उसी संकलन को संविधान कहा जाता है। यह संकलन नियमों, कानूनों, परंपराओं, आदर्शों और सिद्धांतों का होता है, जो शासन के लिए आवश्यक होते हैं। संविधान लिखित भी हो सकता है और अलिखित भी। 2. संविधान की विशेषताएं लिखित संविधान: भारत का सं...

अनुमोदनार्थ या विक्रय-वापसी पर भेजे गए माल में Ownership कब Transfer होता है? | Section 24 Explained in Hindi

हैलो दोस्तों स्वागत है इस पोस्ट में आज हम जानेंगे की स्वामित्व का अंतरण कब होता है 🫴  भारतीय विक्रय-वस्तु अधिनियम, 1930 (Sale of Goods Act, 1930) के अंतर्गत माल के स्वामित्व (Ownership) का अंतरण केवल तभी होता है जब कुछ विशेष शर्तें पूरी की जाती हैं। एक ऐसी स्थिति जो अक्सर सामने आती है, वह है जब कोई वस्तु "अनुमोदनार्थ" (for approval) या "विक्रय या वापसी के लिए" (sale or return basis) दी जाती है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि स्वामित्व (ownership) कब और कैसे क्रेता (buyer) को हस्तांतरित होता है? आइए इसे विस्तारपूर्वक समझें। 🧾 कानूनी प्रावधान का सारांश: जब कोई वस्तु क्रेता को अनुमोदनार्थ या "विक्रय या वापसी के लिए" या अन्य समान शर्तों पर दी जाती है, तो उस वस्तु की मालिकाना हक (ownership) केवल निम्न स्थितियों में ही हस्तांतरित होता है: 🔹 ( क) जब क्रेता माल को स्वीकार करता है: जब ग्राहक (क्रेता) खुले रूप में यह सूचित करता है कि वह माल को स्वीकार कर रहा है, या वह ऐसा कोई कार्य करता है जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसने उस माल को स्वीकार कर लिया है, जैसे म...

भारत का संविधान: क्या यह संघात्मक है या एकात्मक? जानिए विस्तार से

नमस्कार फ्रेंड्स, Thefreshlaw में एक बार फिर से आपका हार्दिक स्वागत है। आज की इस महत्वपूर्ण लेख में हम चर्चा करने जा रहे हैं — "एकात्मक और संघात्मक संविधान तथा सरकार की विश्लेषणात्मक व्याख्या"।  भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में शासन व्यवस्था मुख्यतः दो रूपों में देखने को मिलती है — एकात्मक (Unitary) और संघात्मक (Federal)। इन दोनों शासन व्यवस्थाओं की अपनी-अपनी विशेषताएँ, लाभ और कमियाँ हैं। इस लेख में हम इन दोनों व्यवस्थाओं को विस्तार से समझेंगे। यह विषय भारतीय संविधान, राजनीति विज्ञान और सामान्य ज्ञान के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भूमिका   भारत जैसे विविधता भरे देश में संविधान की भूमिका सिर्फ कानूनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मार्गदर्शक है जो देश की संरचना, उसकी सरकार, नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। जब हम सरकार की बात करते हैं तो वह संविधान की संरचना के अनुरूप होती है। अर्थ  'संघ शासन' शब्द के लैटिन शब्द ' फोएडस'  (foedus) से लिया गया है, जिसका अभिप्राय है संधि या 'समझौता'  संघीय शा...