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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 2: परिभाषाओं की सरल व्याख्या (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, Section 2 Explained in Hindi)

 

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 का स्थान लेने वाला एक नया विधिक दस्तावेज़ है, जिसे आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक दक्ष, तकनीकी रूप से सुसज्जित और नागरिकों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह संहिता न केवल अपराधों की विवेचना और अभियोजन को सुव्यवस्थित करती है, बल्कि इसमें तकनीक के प्रयोग, पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने पर भी बल दिया गया है।

इस संहिता की धारा 2 में प्रयुक्त कुछ प्रमुख शब्दों और अभिव्यक्तियों की परिभाषाएं दी गई हैं, जिनका प्रयोग संपूर्ण अधिनियम में किया गया है। इन परिभाषाओं को समझना आवश्यक है, क्योंकि यह कानून की व्याख्या और क्रियान्वयन की दिशा तय करते हैं।

इस लेख में हम धारा 2 में वर्णित परिभाषाओं को सरल भाषा में समझने का प्रयास करेंगे, ताकि आम नागरिक, विद्यार्थी और विधि से जुड़े व्यक्ति इनका मर्म आसानी से समझ कर सकें।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023)

धारा 2 - परिभाषाएँ-

(1) इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) “श्रव्य दृश्य इलेक्ट्रॉनिक" से अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत वीडियो कांफ्रेंसिंग के प्रयोजनों के लिये, पहचान की आदेशिकाओं को अभिलिखित करना, तलाशी और अभिग्रहण या साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक संसूचना का पारेषण और ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिये किसी संसूचित युक्ति का प्रयोग और ऐसे अन्य साधन भी हैं, जिसे राज्य सरकार नियमों द्वारा उपबंधित करे। (नया जोड़ा गया)

(ख) "जमानत" से किसी अधिकारी या न्यायालय द्वारा अधिरोपित कतिपय शर्तों पर किसी अपराध के कारित किये जाने के अभियुक्त या संदिग्ध व्यक्ति द्वारा किसी बंधपत्र या जमानतपत्र के निष्पादन पर विधि की अभिरक्षा से ऐसे व्यक्ति का छोड़ा जाना अभिप्रेत है। (नया जोड़ा गया)

(ग) “जमानती अपराध" से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जो प्रथम अनुसूची में जमानतीय के रूप में दिखाया गया है या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जमानतीय बनाया गया है और अजमानतीय अपराध से कोई अन्य अपराध अभिप्रेत है।

(घ) "जमानत बांड" का अर्थ जमानत के साथ रिहाई के लिए वचनबद्धता है। (नया जोड़ा गया)

(ङ) "बंधपत्र" से प्रतिभूति के बिना छोड़े जाने के लिए कोई वैयक्तिक बंधत्र या वचनबंध अभिप्रेत है। (नया जोड़ा गया)

(च) "आरोप" के अंतर्गत, जब आरोप में एक से अधिक शीर्ष हों, आरोप का कोई भी शीर्ष है।

(छ) “संज्ञेय अपराध" से इस संहिता के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा कार्रवाई किये जाने की दृष्टि से मौखिक या लिखित रूप में उससे किया गया यह अभिकथन अभिप्रेत है कि किसी व्यक्ति ने, चाहे वह ज्ञात हो या अज्ञात, अपराध किया है, किंतु इसमें पुलिस रिपोर्ट सम्मिलित नहीं है।

(ज) "परिवाद" से इस संहिता के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा कार्रवाई किए जाने की दृष्टि से मौखिक या लिखित रूप में उससे किया गया यह अभिकथन अभिप्रेत है कि किसी व्यक्ति ने, चाहे वह ज्ञात हो या अज्ञात, अपराध किया है, किंतु इसमें पुलिस रिपोर्ट सम्मिलित नहीं है। स्पष्टीकरण ऐसे किसी मामले में, जो अन्वेषण के पश्चात् किसी असंज्ञेय अपराध का किया जाना प्रकट करता है. पुलिस अधिकारी द्वारा की गई रिपोर्ट परिवाद समझी जाएगी और वह पुलिस अधिकारी जिसके द्वारा ऐसी रिपोर्ट की गई है, परिवादी समझा जाएगा।

(झ) "इलेक्ट्रॉनिक संचार" से किसी इलेक्ट्रॉनिक युक्ति, जिसके अंतर्गत टेलीफोन, मोबाईल फोन या अन्य बेतार दूरसंचार युक्ति या कंप्यूटर या श्रव्य दृश्य प्लेयर या कैमरा या कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक युक्ति या इलेक्ट्रॉनिक प्ररूप, जो केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, सम्मिलित है, द्वारा किसी लिखित, मौखिक, सचित्र सूचना या वीडियो अंतर्वस्तु की संसूचना अभिप्रेत है, जिसे (चाहे किसी एक व्यक्ति से अन्य व्यक्ति को या एक युक्ति से किसी अन्य युक्ति को या किसी व्यक्ति से किसी युक्ति को या किसी युक्ति से किसी व्यक्ति को) पारेषित या अंतरित किया जाता है। (नया जोड़ा गया)

(ट) "जांच" से, विचारण से भिन्न, ऐसी प्रत्येक जांच अभिप्रेत है जो इस संहिता के अधीन किसी मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा की जाए।

(ठ) "अन्वेषण" के अंतर्गत वे सब कार्यवाहियां हैं जो इस संहिता के अधीन किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या किसी भी ऐसे व्यक्ति (मजिस्ट्रेट से भिन्न) द्वारा जो मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया है, साक्ष्य एकत्र करने के लिए की जाएं।

स्पष्टीकरण: जहाँ किसी विशेष अधिनियम के उपबंधों में से कोई भी इस संहिता के उपबंधों से असंगत है, वहाँ विशेष अधिनियम के उपबंध अभिभावी होंगे।

(ङ) "न्यायिक कार्यवाही" के अंतर्गत कोई ऐसी कार्यवाही आती है जिसके अनुक्रम में साक्ष्य, वैध रूप से शपथ पर लिया जाता है या लिया जा सकेगा।

(ण) "असंज्ञेय अपराध" से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जिसके लिये, और "असंज्ञेय मामला" से ऐसा मामला अभिप्रेत है जिसमें किसी पुलिस अधिकारी को वारण्ट के बिना गिरफ्तारी करने का प्राधिकार नहीं होता है।

(द) "पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी" के अंतर्गत, जब पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी थाने से अनुपस्थित है या बीमारी या अन्य कारण से अपने कर्त्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है, तब थाने में उपस्थित ऐसा पुलिस अधिकारी है, जो ऐसे अधिकारी से पंक्ति में ठीक नीचे है और कान्स्टेबल की पंक्ति से ऊपर है, या जब राज्य सरकार ऐसा निदेश दे तब, इस प्रकार उपस्थित कोई अन्य पुलिस अधिकारी भी है।

(न) "पुलिस रिपोर्ट" से किसी पुलिस अधिकारी द्वारा धारा 193 की उपधारा (3) के अधीन मजिस्ट्रेट को भेजी गई रिपोर्ट अभिप्रेत है।

(फ) "लोक अभियोजक" से धारा 18 के अधीन नियुक्त कोई व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत लोक अभियोजक के निदेशों के अधीन कार्य करने वाला कोई व्यक्ति भी है।

(ब) "उपखण्ड" से किसी जिले का कोई उपखण्ड अभिप्रेत है। (नया जोड़ा गया)

(भ) "समन-मामला" से ऐसा मामला अभिप्रेत है जो किसी अपराध से संबंधित है और जो वारण्ट-मामला नहीं है।

(म) "पीड़ित" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे अभियुक्त के कार्य या लोप के कारण कोई हानि या क्षति कारित हुई है और इसके अंतर्गत ऐसे पीड़ित का संरक्षक या विधिव वारिस भी है।

(य) "वारण्ट मामला" से ऐसा मामला अभिप्रेत है जो मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय किसी अपराध से संबंधित है।


📌 लेखक परिचय:

यह लेख Dipankarshil Priyadarshi द्वारा लिखा गया है, जो लखनऊ विश्वविद्यालय में विधि के छात्र हैं। Dipankarshil संवैधानिक, आपराधिक और समकालीन विधिक विषयों पर शोधपरक लेखन में सक्रिय हैं। वे 'दीपांकर टेल्स' यूट्यूब चैनल और अपने लॉ ब्लॉग के माध्यम से जटिल कानूनी मुद्दों को सरल, स्पष्ट और विद्यार्थियों की भाषा में प्रस्तुत करते हैं।

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✍️ लेखक: Dipankarshil Priyadarshi
(कानून का छात्र | लेखक | शोधार्थी)

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